नगर निगम जयपुर की अनूठी पहल ‘शिवार्पणम्’: मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी प्रसाद रूपी जैविक खाद

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नगर निगम जयपुर की अनूठी पहल ‘शिवार्पणम्’: मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी प्रसाद रूपी जैविक खाद

सावन माह में आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संगम; श्रद्धालुओं को वितरित होंगे जैविक खाद के ‘शिवार्पणम्’ पैकेट

जयपुर (सिंधु चौपाल संवाददाता जयप्रकाश)।

सावन के पवित्र महीने में धार्मिक श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में पिरोते हुए नगर निगम जयपुर ने एक अभिनव पहल ‘शिवार्पणम्’ की शुरुआत की है। इस योजना के तहत शहर के प्रमुख शिवालयों में भगवान शिव को अर्पित होने वाले बेलपत्र, पुष्प एवं अन्य जैविक निर्माल्य को अब कचरे में नहीं फेंका जाएगा। इन पवित्र अवशेषों को वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद में परिवर्तित कर श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों को ‘शिवार्पणम्’ प्रसाद पैकेट के रूप में वितरित किया जाएगा।

​नगर निगम का उद्देश्य धार्मिक आस्था का पूर्ण सम्मान करते हुए शहर में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को बढ़ावा देना है। सावन के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में जैविक निर्माल्य एकत्रित होता है।

कैसे काम करेगी पूरी व्यवस्था?

अभियान के तहत प्रत्येक सोमवार को चयनित मंदिरों से नगर निगम का ई-व्हीकल (EV) हॉपर निर्माल्य संग्रह करेगा। एकत्रित सामग्री को निकटतम उद्यान में स्थापित श्रेडर मशीन से प्रोसेस किया जाएगा। इसके बाद कम्पोस्ट पिट में वैज्ञानिक विधि से लगभग 30 दिनों में जैविक खाद तैयार की जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट में ये मंदिर शामिल

पायलट परियोजना के अंतर्गत प्रथम चरण में शहर के प्रसिद्ध ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, जंगलेश्वर महादेव, चमकारेश्वर महादेव एवं रोजगारेश्वर महादेव मंदिरों से इस अभियान की शुरुआत की जा रही है। यह विशेष अभियान पूरे श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार निरंतर संचालित किया जाएगा।

“भगवान शिव को अर्पित प्रत्येक बेलपत्र व पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है। उसका स्थान कचरे में नहीं, बल्कि धरती की सेवा में होना चाहिए।”

— ओम कसेरा, आयुक्त (नगर निगम जयपुर)

योजना से मिलने वाले प्रमुख लाभ:

  • मंदिर परिसरों में स्वच्छता: पूजा अवशेषों के तुरंत उठान से मंदिर साफ-सुथरे रहेंगे।
  • कचरा प्रबंधन: डंपिंग यार्ड पर जैविक कचरे का भार काफी कम होगा।
  • संसाधनों का उपयोग: बिना अतिरिक्त निवेश के मौजूदा संसाधनों से पर्यावरण अनुकूल खाद बनेगी।
  • आस्था का सम्मान: ‘शिव को अर्पित हर पत्ता, धरती के लिए प्रसाद बने’ की भावना साकार होगी।

sindhuchaupal
Author: sindhuchaupal

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