BCI कसेगा देशभर के लॉ कालेजों पर शिकंजा

Spread the love

BCI कसेगा देशभर के लॉ कालेजों पर शिकंजा

भोपाल 

भोपाल समेत सूबे के कई लॉ कॉलेजों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के निर्धारित मानकों के अनुरूप पर्याप्त संख्या में असिस्टेंट, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर हैं। कई कालेजों में प्राचार्य तक नियुक्ति नहीं किए गए हैं। उनकी पढाई भगवान भरोसे ही चल रही है। इसकी शिकायत बीसीआई पहुंच गई है। इसलिए बीसीआई ने प्रदेश के कालेजों की जांच करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के तहत 28 कोड के तहत बीस कालेजों में प्राचार्य और प्रोफेसर पदों की स्वीकृति, नियुक्ति और वास्तविक कार्यरत स्थिति का परीक्षण किया जाए।

कालेजों में प्रोफेसर पदों की संख्या एवं नियुक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए बीयू कालेज में शिक्षकों की स्वीकृत संख्या, नियुक्ति, विषयवार योग्यता, सेवा स्थिति और वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन करेगा। प्रो. बीरेंद्र तिवारी का कहना है कि यह विषय केवल शिक्षकों की संख्या का नहीं है, बल्कि विधि शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित और भविष्य में अधिवक्ता के रूप में नामांकन की पात्रता से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है। बीसीआई ने भी स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल प्रारंभिक संबद्धता प्रदान करने तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय को कालेजों की निरंतर शैक्षणिक और प्रशासनिक निगरानी करनी होगी। यहां तक कालेजों पर चलने वाले कालेजों को रोकना होगा।

बीसीआई को भेजी जाएंगी गंभीर कमियां
बीयू को जांच में  कालेज में शिक्षकों, आधारभूत सुविधाओं, पुस्तकालय, मूट कोर्ट, लीगल एड क्लिनिक, नियमित कक्षाओं अथवा अन्य अनिवार्य बीसीआई मानकों में कमी पाई जाती है, तो संबंधित विश्वविद्यालय को संबद्धता के संबंध में नियमानुसार उचित कार्रवाई होगी। निरीक्षण के दौरान कालेजों में गंभीर कमियों मिलती हैं, तो बीयू उनकी जानकारी बीसीआई को भी भेजेगी। हालांकि बीसीआई द्वारा जारी किए आदेश में छह सप्ताह में रिपोर्ट को तलब किय गया है। इसलिए बीयू ने कालेजों का निरीक्षण कराने के लिए कमेटियां का गठन करने के लिए प्रोफेसरों को चयन करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है।

बीसीआई ने कहा है कि यदि किसी कॉलेजों में अनियमितता या कमी पाई जाती है, तो विश्वविद्यालय तुरंत सीबीआई को सूचित करें, ताकि मान्यता खत्म की जाएगी।बीसीआई ने जारी अपने बयान में कहा कि विश्वविद्यालयों की नाकामी की वजह से कई बार अदालतों ने बीसीआई के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की है। अपने आदेश में बीसीआई ने कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा उचित तरीके से जांच-पड़ताल किए बगैर लॉ कॉलेजों द्वारा जमा की गई जानकारी/दस्तावेजों की सच्चाई की पुष्टि किए ही लापरवाही से संबद्धता देती रही हैं। विश्वविद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे ऐसी वीकेंड या शाम की क्लास या शिफ्ट-बेस्ड व्यवस्था की पहचान करें और उसे बंद करें, जो नियमित लॉ पाठ्यक्रम की ज‌रूरी शर्तों को कमजोर करती हो।

लॉ कालेजों की जांच करने के लिए बीसीआई ने पत्र भेजा है। इसके तहत निरीक्षण दल तैयार किए जा रहे हैं।
प्रो एसबी सिंह
रजिस्ट्रार, बीयू

Author:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

FOLLOW US

POll

[democracy id="1"]

TRENDING NEWS

Advertisement

GOLD & SILVER PRICE

Rashifal