बीमारियों का इलाज कराने आ रहे मरीज संक्रमण का खतरा साथ ले जाने को मजबूर; अस्पताल प्रशासन साधे बैठा है मौन
जयपुर (सिंधु चौपाल)।
राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग भले ही प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन धरातल की सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। जयपुर के मानसरोवर स्थित ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर – शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अग्रवाल फार्म’ की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र के दावों की हवा निकाल दी है।
1. प्रवेश द्वार पर पड़ोसी के मलबे का कब्जा

अस्पताल परिसर के ठीक बाहर और मुख्य गेट के सामने पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य का भारी मलबा, ईंटें और गिट्टी खुलेआम बिखरी पड़ी हैं। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अंदर जाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
गेट पर फैले इस अतिक्रमण और मलबे के कारण व्हीलचेयर या स्ट्रैचर निकालना भी लगभग असंभव हो गया है, जिससे हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठा है।
2. अंदर फर्श पर गंदगी और धूल-मिट्टी का जमावड़ा

स्वास्थ्य केंद्र के भीतर कदम रखते ही स्वच्छ भारत अभियानों की हवा निकलती दिखती है। रजिस्ट्रेशन काउंटर, पर्ची विंडो और मरीजों के बैठने के वेटिंग एरिया में जगह-जगह धूल और गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। मरीज घंटों लाइनों में खड़े रहकर पर्ची बनवाते हैं, लेकिन जिस स्थान पर स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहीं धूल-मिट्टी के रूप में संक्रमण फैलाने वाले कारक मौजूद हैं।
3. कचरे के पास लावारिस पड़ा मेडिकल स्ट्रैचर

अस्पताल के अंदरूनी हिस्सों का नजारा और भी चिंताजनक है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाला मेडिकल स्ट्रैचर गंदगी और कचरे के ढेर के पास कबाड़ की तरह रखा हुआ है। स्ट्रैचर के ऊपर धूल की मोटी परत चढ़ी हुई है और पास में ही ‘खतरे’ (Danger) का बोर्ड तथा बलगम जांच की अलमारी रखी है, जो अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करती है।
जनहित में त्वरित कार्रवाई की मांग
अस्पताल में आने वाले मरीजों और क्षेत्रीय निवासियों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगों पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है:
- अतिक्रमण हटाना: अस्पताल के मुख्य द्वार से पड़ोसी का अवैध मलबा तुरंत हटवाया जाए ताकि रास्ते को सुगम बनाया जा सके।
- सफाई व्यवस्था: अस्पताल के भीतर रोजाना नियमित रूप से सफाई और सैनिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए।
- उपकरण रखरखाव: मरीजों के स्ट्रैचर और वेटिंग एरिया की सुविधाओं को सुचारू और स्वच्छ बनाया जाए।
- जवाबदेही तय हो: इस घोर लापरवाही और उदासीनता पर संज्ञान लेते हुए दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।