गृहिणियां हर साल 22 लाख करोड़ रुपये का घरेलू काम करती हैं मुफ्त, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली

भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार की देखभाल करती हैं। इन घरेलू कार्यों का यदि वेतन दिया जाए तो लगभग 22.7 लाख करोड़ रुपये की रकम होगी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली बार गृहिणियों (होममेकर्स) द्वारा बिना पैसे के किए जाने वाले घरेलू कामकाज के महत्व को स्वीकारा था। शीर्ष अदालत ने घरेलू महिलाओं को ‘राष्ट्र निर्माता’ भी कहा था। भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ‘टाइम-यूज सर्वे’ (जनवरी-दिसंबर 2024) की रिपोर्ट से पता चलता है कि महिलाएं बिना वेतन वाले घरेलू कामकाज और देखरेख पर रोजाना 7 घंटे खर्च करती है।

महिलाओं का कार्य समय
रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं (महज 6 साल और उससे अधिक उम्र की) बिना पैसे वाले घरेलू कामकाज जैसे साफ-सफाई, खाना बनाना, कपड़े धोना, जैसे कामों पर रोजाना 289 मिनट खर्च करती हैं, जबकि बच्चों और बुजुर्गों की देखरेख पर 137 मिनट लगाती हैं, लेकिन इन कामों के बदले उन्हें कोई पैसा नहीं मिलता है। एक शोध के मुताबिक भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार के देखभाल करती हैं। यदि महिलाओं को इन कार्यों के बदले वेतन देना पड़े तो यह लगभग 22.7 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो कि देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.5 फीसदी है। भारतीय स्टेट बैंक की एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाओं द्वारा किए जाने वाले बिना वेतन वाले घरेलू और देखभाल के कामों की सालाना आर्थिक कीमत का अनुमान ₹22.7 लाख करोड़ लगाया गया है।

देशभर में यह रकम 10.8 ट्रिलियन डॉलर है

दुनिया भर में अवैतनिक कार्य

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि दुनिया भर में 15 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाएं हर दिन बिना पैसे वाले देखभाल के कामों में 12.5 अरब घंटे बिताती हैं, जिसकी सालाना कीमत कम से कम 10.8 ट्रिलियन डॉलर है।

महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी करते हैं बिना पैसे वाले काम

पुरुषों का योगदान

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी बिना वेतन वाले घरेलू काम करते हैं, लेकिन महिलाओं की तुलना में काफी कम। रिपोर्ट मुताबिक घरेलू कामकाज में पुरुष महज 88 मिनट बिताते हैं, जबकि बच्चों-बुजुर्गों की देखरेख में 75 मिनट बिताते हैं।

उम्र का प्रभाव
रिपोर्ट के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं पर बिना पैसे वाले घरेलू कामकाज और बच्चों-बुजुर्गों की देखभाल के कामों का बोझ बढ़ता जाता है। आंकड़ों के मुताबिक 15 से 59 साल की उम्र की महिलाएं ऐसे कामों में रोजाना 305 मिनट बिताती हैं। 2019 में यह समय 315 मिनट था, अब इसमें थोड़ी कमी आई है। इसी उम्र समूह के 41 फीसदी महिलाएं घर के सदस्यों की देखभाल में शामिल थीं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा महज 21.4 फीसदी था।

सामान्य प्रश्न

✦भारत में कितनी महिलाएं बिना वेतन घरेलू काम करती हैं?−

भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक महिलाएं बिना किसी वेतन के घरेलू कामकाज और अपने परिवार की देखभाल करती हैं।

✦महिलाएं घरेलू कामों में रोजाना कितना समय बिताती हैं?+

✦महिलाओं द्वारा घरेलू कार्यों की आर्थिक कीमत क्या है?+

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