
17 बार पेपर लीक होने पर नहीं दिया इस्तीफा, अब केंद्रीय मंत्री पर निशाना साधना दोहरे मापदंड का प्रतीक
जयपुर (सिंधु चौपाल संवाददाता जयप्रकाश)।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज उनकी राजनीतिक स्थिति सबसे अधिक शर्मनाक हो चुकी है। जब डोटासरा स्वयं राजस्थान के शिक्षा मंत्री थे और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, तब प्रदेश में रिकॉर्ड 17 बार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए। यहाँ तक कि दो बार विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्र भी लीक हुए, लेकिन उस समय उन्होंने नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा देने की ज़हमत तक नहीं उठाई।
राठौड़ ने कहा कि अब वही डोटासरा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जो उनके दोहरे चरित्र और अवसरवादी रवैये को साफ दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो स्वयं आकंठ भ्रष्टाचार और अव्यवस्था में डूबे रहे, वे किस मुँह से दूसरों से नैतिकता की उम्मीद कर रहे हैं?
“जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाले कर रहे हैं राजनीति”
राठौड़ ने याद दिलाया कि अपने कार्यकाल के दौरान डोटासरा ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था कि परीक्षाएं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कराता है। आज जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का संचालन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) करती है, तब केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा मांगना पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। जनता कांग्रेस के इस दोहरे मापदंड को अच्छी तरह समझ चुकी है।
सदन में चर्चा से भाग रहा है नेतृत्वविहीन विपक्ष
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस और पूरे विपक्ष के पास आज कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। संसद में जब केंद्र सरकार हर विषय पर खुले दिल से चर्चा के लिए तैयार है, तब विपक्ष चर्चा से भागने का प्रयास करता है और केवल हंगामा खड़ा करना चाहता है। यदि विपक्ष के पास वास्तव में तथ्य हैं तो उन्हें सदन में चर्चा करनी चाहिए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
राष्ट्रविरोधी तत्वों का समर्थन निंदनीय
राठौड़ ने दिल्ली में हुए हालिया विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने ऐसे असामाजिक तत्वों का समर्थन किया, जिन्होंने भारत विरोधी, राष्ट्र विरोधी और प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए। इस प्रकार के तत्वों का समर्थन करना कांग्रेस की असली मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि आज पूरा विपक्ष नेतृत्वविहीन हो चुका है और सिर्फ राजनीतिक नौटंकी में लगा है। वहीं केंद्र सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े कानूनों का प्रावधान लागू किया है।