चार्टर्ड अकाउंटेंट के सिलेबस में होंगे अहम बदलाव, एआई और नई तकनीक का बढ़ेगा दखल, टैक्स कानून के नए बदलावों पर भी मंथन

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विवेक झा, भोपाल। चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई और पेशेवर कार्यप्रणाली बदलते कारोबारी माहौल के साथ तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल फाइनेंस जैसे क्षेत्रों का महत्व बढ़ने के साथ सीए शिक्षा में भी इन आधुनिक तकनीकों पर जोर बढ़ रहा है। इसी बीच आयकर कानूनों में लगातार हो रहे बदलावों और न्यायालयों के नए फैसलों ने सीए प्रोफेशनल्स के सामने नई चुनौतियां और अवसर खड़े किए हैं।

इन्हीं विषयों पर चर्चा के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की डायरेक्ट टैक्सेस कमेटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘प्रारंभ-व्हेयर जर्नी टू एक्सीलेंस बिगिन्स’ का शनिवार को भोपाल में शुभारंभ हुआ। होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आयोजित सम्मेलन में देशभर से 600 से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर विशेषज्ञ शामिल हुए। मुख्य अतिथि भोपाल सांसद आलोक शर्मा रहे।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों पर मंथन

संगोष्ठी के पहले तकनीकी सत्र में ‘इनकम टैक्स एक्ट के अंतर्गत माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के ऐतिहासिक निर्णय’ विषय पर सीए (डॉ.) कपिल गोयल ने हालिया न्यायिक फैसलों का तकनीकी विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि आयकर से जुड़े मामलों में न्यायालयों के फैसलों का कर निर्धारण और करदाताओं की अनुपालन व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है। गोयल ने बताया कि इन फैसलों से ब्याज कटौती, पुनर्मूल्यांकन, करदाता की गोपनीयता और TDS रिफंड जैसे मुद्दों पर करदाताओं को महत्वपूर्ण कानूनी दिशा मिली है।

फाइनेंस एक्ट और आयकर संशोधन भी चर्चा में

दूसरे तकनीकी सत्र में सीए प्रमोद कुमार ने फाइनेंस एक्ट 2026 के मुख्य बिंदु एवं आयकर अधिनियम संशोधन 2025 पर जानकारी दी। उन्होंने नए कर प्रावधानों और उनके व्यावहारिक प्रभावों को समझाया। तीसरे सत्र में डायरेक्ट टैक्सेस कमेटी के उपाध्यक्ष सीए पंकज शाह ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में सामान्य गैर-अनुपालन विषय पर सदस्यों को संबोधित किया।

बदल रही है सीए की पढ़ाई

इस अवसर पर आईसीएआई के प्रेसिडेंट सीए प्रसन्ना कुमार डी ने बताया कि आने वाले समय में सीए विद्यार्थियों के लिए केवल अकाउंटिंग, टैक्सेशन और ऑडिट का पारंपरिक ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। एआई आधारित अकाउंटिंग, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल फाइनेंस, साइबर रिस्क, कॉरपोरेट गवर्नेंस और इंटरनेशनल टैक्सेशन जैसे क्षेत्रों की समझ भी महत्वपूर्ण होगी।

ICAI की नई शिक्षा एवं प्रशिक्षण व्यवस्था में फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल स्तर पर विषयों को आधुनिक कारोबारी जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थित किया गया है। केस आधारित अध्ययन, प्रैक्टिकल स्किल्स, विश्लेषणात्मक क्षमता और प्रोफेशनल एथिक्स पर भी जोर बढ़ा है।

नई पीढ़ी के सीए के लिए नई तैयारी

प्रसन्ना कुमार ने बताया कि ICAI की दिशा से साफ है कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी शिक्षा को भविष्य की अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा है। एआई और ऑटोमेशन जहां अकाउंटिंग के पारंपरिक कामों को बदल रहे हैं, वहीं सीए की भूमिका वित्तीय सलाहकार, बिजनेस स्ट्रैटेजिस्ट और रिस्क एक्सपर्ट के रूप में और महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में सिलेबस और ट्रेनिंग में होने वाले बदलाव आने वाली पीढ़ी के सीए को नई तकनीक और वैश्विक कारोबारी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

तकनीक के साथ बदल रही भूमिका

पीडीसी चेयरमैन एवं कांफ्रेस डायरेक्टर सीए अभय छाजेड़ ने बताया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई के बढ़ते इस्तेमाल के कारण सीए की भूमिका भी सिर्फ खातों की जांच और टैक्स रिटर्न तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में सीए से डेटा विश्लेषण, कारोबारी जोखिमों की पहचान, टैक्स प्लानिंग और रणनीतिक वित्तीय सलाह देने की अपेक्षा बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि सीए विद्यार्थियों को आने वाले समय में अकाउंटिंग और टैक्सेशन के साथ-साथ एआई, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल फाइनेंस, साइबर रिस्क, कॉरपोरेट गवर्नेंस, एथिक्स और बिजनेस स्ट्रैटेजी जैसे क्षेत्रों की समझ विकसित करनी होगी। यानी सीए बनने की राह में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। बदलते कारोबारी वातावरण में तकनीक को समझने और उसका व्यावहारिक इस्तेमाल करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

भारत की टैक्स की दरें सबसे कम

डायरेक्ट टैक्सेस कमेटी के वाइस प्रेसिडेंट सीए पंकज शाह ने बताया कि देश में कर व्यवस्था को सरल और करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। नई आयकर व्यवस्था में मध्यम आय वर्ग को बड़ी राहत दी गई है। आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 12 लाख रुपए तक की सामान्य आय पर धारा 87A के तहत अधिकतम 60 हजार रुपए की रिबेट उपलब्ध है। शाह ने बताया कि भारत की कर दरें विश्व में सबसे कम हैं। कर दरों के साथ-साथ अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना भी महत्वपूर्ण है। डिजिटल टैक्स सिस्टम, ऑनलाइन रिटर्न फाइलिंग और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से कर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ी है।

सम्मेलन के आयोजन में आईसीएआई भोपाल शाखा के अध्यक्ष एवं सम्मेलन समन्वयक सीए आदित्य श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष सीए प्रदीप मुटरेजा, सचिव सीए अभिषेक जैन, कोषाध्यक्ष सीए नंदन नरुला, सिकासा अध्यक्ष सीए पीयूष चतर तथा कार्यसमिति सदस्यों सीए अर्पित राय और सीए सुचिता गोयल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

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