सिख दंगों में दोषी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का कारावास में निधन

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कांग्रेस के पूर्व सांसद और नेता सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सज्जन कुमार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के दो मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

वे 1980 के दशक में उत्तर-पश्चिम और बाहरी दिल्ली सीट से कांग्रेस के प्रमुख चेहरे बनकर उभरे और तीन बार (1980, 1991 और 2004) लोकसभा सांसद चुने गए। बाहरी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी।1984 के दंगों में नाम आने के बाद उनका राजनीतिक करियर विवादों में घिर गया था। वर्ष 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

सज्जन कुमार दिल्ली के प्रभावशाली कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद थे. 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में जन्मे सज्जन कुमार ने राजनीति की शुरुआत 1970 के दशक में की. वो दिल्ली नगर निगम के काउंसलर बने, फिर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव रहे. 1980, 1991 और 2004 में वह लोकसभा सांसद चुने गए. वह संजय गांधी के करीबी माने जाते थे और बाहरी दिल्ली क्षेत्र से कांग्रेस के मजबूत चेहरे थे. 2018 में दोषसिद्धि के बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

आपको बता दें कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में उन पर भीड़ भड़काने, हत्या और हिंसा भड़काने के आरोप थे. दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2918 को पालम कॉलोनी मामले में उन्हें दोषी ठहराया, जिसमें पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारे को आग लगाने का मामला था. इस मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई. फरवरी 2025 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सरस्वती विहार मामले में भी उन्हें दोषी करार दिया, जिसमें जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुनदीप सिंह की हत्या का आरोप था. इस मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा मिली. हालांकि, कुछ अन्य मामलों (जैसे सुल्तानपुरी और जनकपुरी-विकासपुरी) में वह बरी हो चुके थे. वो तिहाड़ जेल में इन सजाओं को काट रहे थे।

वर्ष 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भड़के सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार पर भीड़ को उकसाने और हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगा था। करीब 34 वर्षों तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद 31 दिसंबर 2018 को उन्होंने अदालत में समर्पण किया था।

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Author: sindhuchaupal

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