सांगानेर में युवा कार्यकर्ताओं को मौका देने की आवश्यकता
सांगानेर में नगर निगम चुनाव की तैयारी जोरों पर है। चुनावी मैदान में पुराने पार्षदों को हटाने की मांग उठ रही है। जनता का कहना है कि पिछले दो कार्यकालों से कुर्सी पर जमे पार्षदों को अब विश्राम दिया जाना चाहिए। जयपुर नगर निगम चुनाव की बिसात बिछ चुकी है, लेकिन असली तमाशा उन 'अनुभवी' पार्षदों का है जो पिछले दो कार्यकाल से कुर्सी पर जमे हुए हैं। सांगानेर की जनता अब पूछ रही है कि क्या वार्ड की सेवा का ठेका जीवनभर के लिए किसी एक व्यक्ति के नाम ही लिख दिया गया है। चुनाव आते ही युवाओं को झंडे और पोस्टरों का बंडल थमाया जाता है, लेकिन जब कमान सौंपने की बारी आती है, तो वही पुराने नेता आगे आकर खड़े हो जाते हैं। यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सांगानेर के वार्डों में दशक भर से जमे पुराने नेताओं को बदलने में हिचकिचाहट क्यों हो रही है? पुराने दिग्गजों के स्थान पर युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देने की बात की जा रही है। दो-दो कार्यकाल पूरे कर चुके नेताओं को अब 'मार्गदर्शक मंडल' में भेजने का वक्त आ गया है। नए और समर्पित कार्यकर्ताओं को केवल दरी बिछाने में उलझाकर नहीं रखा जा सकता। इस बार 'नो-रिपीट पॉलिसी' का कड़ा संदेश दिया जा रहा है। सांगानेर से इस बार बदलाव की आवश्यकता है ताकि युवा सोच को काम करने का अवसर मिल सके। महिला आरक्षण में भी केवल पार्षदों की पत्नियों को आगे लाने के बजाय पढ़ी-लिखी और सक्रिय महिलाओं को मौका दिया जाना चाहिए। दो-दो कार्यकाल पूरे कर चुके नेताओं को अब विश्राम देने का समय आ गया है। सांगानेर की जनता अब बदलाव चाहती है। पुराने मोहरों को विश्राम दीजिए और युवा सोच को काम करने का अवसर दीजिए। यह विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अपनी कर्मभूमि है। जब एक ज़मीनी कार्यकर्ता अपनी निष्ठा से प्रदेश के सर्वोच्च पद तक पहुँच सकता है, तो फिर सांगानेर के वार्डों में दशक भर से मलाई चाट रहे पुराने दिग्गजों को बदलने में हिचकिचाहट क्यों? सांगानेर की जनता ने इस बार ठान लिया है कि वे बदलाव लाएंगे। चुनाव आते ही युवाओं को झंडे और पोस्टरों का बंडल तो थमा दिया जाता है, लेकिन अब वे खुद को आगे लाने के लिए तैयार हैं।

