भारत में गिग वर्कर्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है
भारत में गिग वर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। गिग वर्कर्स की संख्या में वृद्धि के पीछे कई कारक हैं, जिनमें स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान उपलब्धता, ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा और ई-कॉमर्स का तेजी से बढ़ता बाजार शामिल है। 2020 में गिग वर्कर्स की संख्या 77 लाख थी। भारत में गिग वर्कर्स का एक बड़ा हिस्सा मध्यम कौशल वाले कामों में है। नीति आयोग के अनुसार, 2026 तक गिग वर्कर्स की संख्या 68 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। इस वृद्धि का मुख्य कारण नौकरी की अनिश्चितता और लोगों की बढ़ती आर्थिक जरूरतें हैं। डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर, फ्रीलांसर और घरेलू सेवाएं देने वाले कर्मचारी अब इस नए वर्क कल्चर का हिस्सा बन रहे हैं। इससे साफ है कि लोग अब केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे कमाई के कई रास्तों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। 2026 के एक इन्दीद सर्वे में भारतीय कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मौजूदा आय आराम से जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है। यह स्थिति साइड इनकम की बढ़ती जरूरत को दर्शाती है। भारत में गिग इकोनॉमी के सामने सबसे बड़ा सवाल केवल रोजगार बढ़ने का नहीं है, बल्कि कमाई की स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और काम की बेहतर परिस्थितियों का भी है। सरकार की नीतियां, प्लेटफॉर्म कंपनियों की जिम्मेदारी और कामगारों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा भी इस नए वर्क कल्चर की दिशा तय करेगी। मार्केट में घटते जॉब, ले-ऑफ के खतरे, एआई का मार्केट, महंगाई और परिवार की जिम्मेदारी ने लोगों को गिग वर्क के लिए मजबूर कर दिया है। लोग अब केवल नौकरी तक खुद को सीमित नहीं रख रहे हैं। भारत में गिग वर्क का यह नया ट्रेंड रोजगार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की दिशा में बढ़ रहा है। गिग वर्कर्स को लेकर सरकार ने कानूनी स्तर पर भी कदम उठाए हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में पहली बार गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर की परिभाषा और उनके लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रावधान किया गया है। अमेरिका में गिग वर्क का दायरा केवल डिलीवरी या कैब चलाने तक सीमित नहीं है। इसमें स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर, फ्रीलांसर, ऑन-कॉल वर्कर और टेंपरेरी वर्क भी शामिल होते हैं। अमेरिका में इस तरह के काम को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा फ्लेक्सिबिलिटी बनाम नौकरी की सुरक्षा है। स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर को काम करने की ज्यादा आजादी मिल सकती है, लेकिन कर्मचारी के तौर पर मिलने वाले कुछ लाभ और सुरक्षा उन्हें नहीं मिलते। भारत में गिग वर्कर्स की संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण स्मार्टफोन और इंटरनेट की आसान उपलब्धता है। ऑनलाइन पेमेंट और फूड डिलीवरी ने ऐसे कामों के अवसर बढ़ाए हैं। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में 7. 4 प्रतिशत कामगार अपने मुख्य या एकमात्र काम में स्वतंत्र कांट्रेक्टर थे। वहीं, 4. 3 प्रतिशत कामगार ऐसे थे जो कंटिंजेंट जॉब्स में थे। भारत में गिग वर्क का बड़ा हिस्सा मध्यम कौशल वाले कामों में है। नीति आयोग के अनुसार, 2020-21 में गिग वर्क में 47 प्रतिशत मीडियम-स्किल्ड, 22 प्रतिशत हाई-स्किल्ड और 31 प्रतिशत लो-स्किल्ड काम शामिल थे। भारत में गिग इकोनॉमी के बढ़ने का अंदाजा सरकारी आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। अमेरिका में गिग वर्क के लिए लोग अब केवल ऐप के जरिए कैब चलाने या सामान पहुंचाने तक ही सीमित नहीं हैं। इसमें फ्रीलांसर, स्वतंत्र सलाहकार और दूसरे काम भी शामिल होते हैं। भारत में गिग वर्कर्स को लेकर सरकार ने कानूनी स्तर पर भी कदम उठाए हैं। गिग वर्क का यह नया ट्रेंड भारत में रोजगार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की दिशा में बढ़ रहा है। भारत में गिग वर्क का बढ़ना एक बड़ा संकेत है कि लोग अब केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते।
