सिंधी समाज ने जयपुर में नाग पंचमी पर गोगड़ा पर्व धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। पर्व की शुरुआत में चूल्हे पर कच्चा दूध, चावल और जल अर्पित करके परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की गई। इसके बाद चूल्हे को ठंडा किया गया। गोगड़ा पर्व की सुबह महिलाएं घर में तैयार किए गए पारंपरिक पकवान लेकर पीपल या बरगद के वृक्ष के पास पहुंचीं। वहां मौली का धागा बांधकर दीप जलाया गया और नागदेवता को भोग अर्पित किया गया। कच्चा दूध, भीगे चने, आटा, घी और शक्कर से तैयार प्रसाद भी अर्पित किया गया। वृक्ष को नागदेवता का प्रतीक मानकर पूजा-अर्चना करते हुए घर में बनाए गए मीठे लोले सहित अन्य पकवानों का भोग लगाया गया। इस दौरान महिलाओं ने नागदेवता और देवी-देवताओं से परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य, समृद्धि और बच्चों की दीर्घायु की प्रार्थना की। पूजा के बाद अरदास की गई, जिसमें प्रसाद के रूप में ग्रहण किए पकवानों का वितरण किया गया। पारिवारिक सदस्यों ने इन पारंपरिक पकवानों को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इस प्रकार, पर्व ने धार्मिक आस्था के साथ नई पीढ़ी को समाज की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया। सिंधी समाज में गोगड़ा पर्व का महत्व विशेष है, क्योंकि इसी पर्व के साथ प्रमुख धार्मिक पर्वों का सिलसिला शुरू होता है। सरिता डोडवानी ने बताया कि नाग पंचमी से शुरू होकर यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। नागों की माता मानसी देवी ने भगवान शिव से नाग पूजा का वरदान मांगा था, जिसके अनुसार सावन माह की पंचमी को सबसे पहले नागों की पूजा होती है।
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गोगड़ा पर्व की धूम, नाग पंचमी पर पूजा
24 अगस्त 2026 को 5:33 pm बजे

गोगड़ा पर्व की धूम, नाग पंचमी पर पूजा
