दावेदारों की नई रणनीतियों का दौर
सांगानेर में निकाय चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। शहर की गलियां और चौराहे अब 'भावी समाजसेवियों' से भर गए हैं। जो नेता जी कल तक आमने-सामने आने पर नजरें चुराते थे, वे अब मोहल्ले के हर बुजुर्ग के चरण स्पर्श करते और बच्चों को दुलारते नजर आ रहे हैं। हर संभावित दावेदार की स्थिति जैसे नए स्नातक की हो गई है, जो पहला जॉब इंटरव्यू देने जा रहा हो। दावेदार अपने रंगीन बायो-डाटा के पुलिंदों के साथ स्थानीय आकाओं के बंगलों के चक्कर काटने लगे हैं। अब हर शाम किसी न किसी पड़ोसी के घर चाय पर चर्चा और समर्थन जुटाने की बैठकें हो रही हैं। कुछ दावेदार जिन्होंने सालों से अपने बहुमंजिला मकान की सीढ़ियां नहीं चढ़ीं, वे आज पूरे वार्ड की चार-मंजिला इमारतों की सीढ़ियां बिना हांफे चढ़ रहे हैं। सुबह से शाम तक हर दरवाजे पर घंटी बजाना और 180 डिग्री पर झुककर प्रणाम करना इनकी दिनचर्या बन चुका है। घर वाले भी हैरान हैं कि जो व्यक्ति घर में पानी का गिलास खुद उठाकर नहीं पीता था, वह अब वार्ड का दुख-दर्द दूर करने के दावे कर रहा है। माहौल को अपने पक्ष में बनाने के लिए चाय-समोसे के ठेकों पर दोस्तों और समर्थकों की दिखावटी भीड़ इकट्ठा की जा रही है।
