— जयप्रकाश बूलचंदानी /जयपुर / सांगानेर। राज्य सरकार जहाँ एक ओर 'राइजिंग राजस्थान' के जरिए देश-विदेश से भारी निवेश आकर्षित करने का दावा कर रही है, वहीं प्रदेश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल और हस्तशिल्प केंद्र सांगानेर बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक उपेक्षा के भंवर में फंसा हुआ है।
सांगानेर में वर्तमान में लगभग 3,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ संचालित हैं। यदि एक औसत अनुमान भी लगाया जाए तो हर फैक्ट्री सालाना कम से कम ₹25 लाख का जीएसटी (GST) सरकारी खजाने में जमा कराती है। इस हिसाब से सांगानेर का उद्योग क्षेत्र अकेले ₹750 करोड़ से अधिक का वार्षिक जीएसटी राजस्व सरकार को देता है। इसके बावजूद, जब भी क्षेत्र में प्रदूषण या अपशिष्ट जल (Effluent) निकासी का मुद्दा उठता है, तो प्रशासन का सबसे आसान कदम होता है—फैक्ट्रियों को सील करना या बंद करने का फरमान जारी करना।
जमीनी हकीकत: केवल 892 इकाइयाँ सीईटीपी से जुड़ीं, 2,000 से अधिक फैक्ट्रियाँ बेसहारा
सांगानेर के कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में केवल 892 फैक्ट्रियाँ ही सीईटीपी (CETP) से जुड़ी हुई हैं और इसके मानकों के तहत जल शोधन की सुविधा प्राप्त कर रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाकी 2,000 से अधिक फैक्ट्रियों का क्या?
ड्रेनेज लाइन और सीईटीपी का विस्तार न होने के कारण ये 2,000 से अधिक इकाइयाँ कानूनी इंफ्रास्ट्रक्चर से बाहर हैं।
सुविधाओं के अभाव में जब भी प्रदूषण की स्थिति बनती है, तो प्रशासन इन फैक्ट्रियों को बंद करने या सील करने की कार्रवाई करता है, जो लाखों मजदूरों के पेट पर सीधा लात मारने जैसा है।
तालाबंदी समाधान नहीं: 1 साल का GST राजस्व ही बदल सकता है तस्वीर
किसी भी स्थापित उद्योग को बंद कर देना प्रदूषण नियंत्रण का समाधान नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है। सांगानेर केवल मशीनों का समूह नहीं है, यह जीआई (GI) टैग प्राप्त विश्वप्रसिद्ध 'सांगानेरी प्रिंट' का गढ़ है, जहाँ से लाखों परिवारों का पालन-पोषण होता है।
यदि राज्य सरकार सांगानेर से प्राप्त होने वाले केवल 1 वर्ष के जीएसटी राजस्व (₹750 करोड़) को पूरी निष्ठा के साथ इसी क्षेत्र के पुनरुद्धार पर खर्च कर दे, तो स्थिति में तुरंत क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है:
सीईटीपी (CETP) की क्षमता का सुधार व विस्तार: वर्तमान सीईटीपी को अत्याधुनिक ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक पर अपग्रेड किया जाए।
2,000+ फैक्ट्रियों का समावेशन: जो 2,000 से अधिक फैक्ट्रियाँ फिलहाल सीईटीपी से बाहर हैं, उनके लिए विशेष सदस्यता अभियान चलाकर और नए मिनी-सीईटीपी क्लस्टर बनाकर उन्हें मुख्य धारा में जोड़ा जाए।
समर्पित इंडस्ट्रियल ड्रेनेज लाइन: पूरे सांगानेर में अंडरग्राउंड इंडस्ट्रियल ड्रेनेज नेटवर्क बिछाया जाए ताकि केमिकल युक्त पानी किसी भी सूरत में खुले नालों में न बहे।
मुख्यमंत्री का अपना निर्वाचन क्षेत्र: ऐतिहासिक अवसर
यह तथ्य इस पूरे विषय को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है कि सांगानेर स्वयं प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी का अपना निर्वाचन क्षेत्र है। मुख्यमंत्री का क्षेत्र होने के नाते यहाँ के उद्यमियों, कारीगरों और निवासियों की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से बहुत ऊँची हैं।
मुख्यमंत्री जी के सशक्त नेतृत्व में सांगानेर को सीलिंग और तालाबंदी की खौफनाक छाया से निकालकर "ग्रीन एवं इको-फ्रेंडली मॉडल इंडस्ट्रियल पार्क" के रूप में विकसित करने का यह सबसे उपयुक्त समय है।
विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। 'राइजिंग राजस्थान' का सपना तब तक अधूरा रहेगा जब तक राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर सांगानेर प्रदूषण और बेबसी के साये में रहेगा। सरकार को सीलिंग का दंडात्मक रास्ता छोड़कर तकनीक, रीसाइक्लिंग और 2,000 से अधिक छूट गई फैक्ट्रियों को सीईटीपी से जोड़ने का रास्ता चुनना होगा, ताकि उद्योग भी चले, रोजगार भी बचे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।
