सिंधु चौपाल (जयपुर)जयपुर की मुहाना फल-सब्जी मंडी (सेकंड फेज) अब सीधी दलाली, खुली तानाशाही और प्रशासनिक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। मंडी समिति द्वारा थमाए गए लचर और बेअसर नोटिसों का धरातल पर सरेआम मज़ाक उड़ रहा है। यह कार्रवाई किसी अव्यवस्था को सुधारने के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्ट तंत्र को बचाने, अधिकारियों की साख बचाने और पीछे से 'सेटिंग' का रेट तय करने के लिए रचा गया एक बहुत बड़ा षड्यंत्र नजर आ रहा है!
सक्रिय हुए 'दलाल नेता', दूसरों की दुकानों पर डाका डालकर चला रहे वर्चस्व
मंडी के सूत्र बता रहे हैं कि अंदरखाने एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो चुका है। कुछ स्वयंभू और दलाल किस्म के तथाकथित 'नेता' अचानक बिलों से बाहर निकल आए हैं, जो अवैध कब्जाधारियों और अतिक्रमणकारियों को एकत्र करके अफसरों के साथ साठगांठ का खेल रच रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला सच तो यह है कि इनमें से कई फर्जी नेता खुद दूसरों की दुकानों के आगे ऑक्शन प्लेटफॉर्म और मुख्य रास्तों पर अवैध कब्जा जमाकर बैठे हैं और वहीं से अपनी अवैध वसूली तथा साठगांठ का नेटवर्क चला रहे हैं
बिना समय-सीमा का 'कागजी ड्रामा': सीधे वसूली का इंतजाम?
मंडी प्रशासन द्वारा जारी नोटिस खुद उनकी नीयत और काली साठगांठ की गवाही दे रहा है:
न कोई डेडलाइन, न टाइम-लिमिट: नोटिस में कब्जा हटाने या शिफ्ट होने का कोई समय तय नहीं किया गया है।
न कोई जवाब-तलब: आवंटी से किसी प्रकार का लिखित कारण या स्पष्टीकरण भी नहीं मांगा गया है।
सीधा सवाल: जब नोटिस में न कोई समय-सीमा है और न ही कोई जवाब मांगा गया है, तो इस कागजी रद्दी के टुकड़े का क्या मतलब है?
मंडी के कोने-कोने में एक ही बात गूंज रही है—यह नोटिस केवल आम जनता की आंखों में धूल झोंकने और दलालों के जरिए पीछे से 'सेटिंग' फिक्स करने का पक्का इंतजाम है!
एसी कमरे का मोह छोड़ें सचिव नरेश यादव, तुरंत चलाएं बुलडोजर!
मंडी सचिव नरेश यादव जी, वातानुकूलित (AC) दफ्तर के ऐशो-आराम और कागजी लीपापोती से बाहर निकलिए! बंद कमरों में बैठकर यह बेअसर और फर्जी नोटिस बांटने का खेल अब बंद होना चाहिए। अगर प्रशासन में रत्ती भर भी ईमानदारी बची है, तो इन दलालों, माफियाओं और सड़कों पर सीना तानकर कब्जा जमाए बैठे अतिक्रमणकारियों पर तुरंत बुलडोजर चलाइए। वरना यह मान लिया जाएगा कि इस पूरे काले कारोबार और अवैध वसूली के खेल में मंडी प्रशासन खुद बराबर का हिस्सेदार और मास्टरमाइंड है!
