विशेष रिपोर्ट: सिंधु चौपाल ब्यूरो, सांगानेर/जयपुर
विश्व प्रसिद्ध सांगानेरी प्रिंट और रंगाई-छपाई उद्योग की आड़ में एक ऐसा खौफनाक और आत्मघाती खेल खेला जा रहा है, जो पूरे सांगानेर और इसके आसपास के गांवों के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। सदियों पुरानी विरासत और हुनर की इस पावन धरती पर आज चंद लोगों के निजी स्वार्थ के कारण पर्यावरण का ऐसा विनाश हो रहा है कि सांगानेर का भविष्य गहरे अंधेरे में डूबता नजर आ रहा है। सड़कों पर केमिकल का बदबूदार पानी बहाने से होने वाले चालान और प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए फैक्ट्री मालिकों ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते हुए प्रदूषण फैलाने का एक बेहद शातिर और घातक तरीका निकाल लिया है।
सांगानेर के गंवार ब्राह्मणान और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कृषि भूमि अथवा फार्म हाउस के नाम पर बिना किसी भू-रूपांतरण के जमीनें ली जा रही हैं। इसके बाद वहां चुपचाप कमर्शियल तरीके से विशालकाय रंगाई-छपाई की फैक्ट्रियां स्थापित कर दी जाती हैं। इन अवैध फैक्ट्रियों के पीछे पड़े खाली प्लॉटों में जेसीबी से बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे खोदकर कृत्रिम तालाब बना दिए गए हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला केमिकल पानी खुलेआम इन गड्ढों में भरा जाता है, जो सीधे रिसाव के जरिए भूजल में शामिल हो रहा है।
घनी बबूल की झाड़ियों और कच्चे नालों की आड़ लेकर इस जहरीले केमिकल वेस्ट को खुले में जमा किया जा रहा है। रिहाइशी आबादी और कृषि क्षेत्रों के बिल्कुल मुहाने पर जमा हो रहा यह एसिड और भारी धातुओं से युक्त केमिकल पानी आसपास के पूरे प्राकृतिक तंत्र को दीमक की तरह चाट रहा है। भूमिगत जल स्तर में जहर घुलने से पूरे इलाके की पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है, जिससे इस ऐतिहासिक क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप और कृषि संस्कृति के वजूद पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
यह पूरा खौफनाक और अवैध खेल सांगानेर की धरती पर खुलेआम चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह निष्प्राण और मूकदर्शक बना हुआ है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमों और कागजी दावों के बावजूद खुले में जहरीला पानी डालने वालों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। जयपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम बिना भू-रूपांतरण के चल रहे इन व्यावसायिक निर्माणों पर आंखें मूंदे हुए हैं, वहीं कृषि एवं सिंचाई विभाग भी उपजाऊ भूमि में जहर घुलने के बावजूद कोई निगरानी नहीं रख रहा है। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि सांगानेर के अंदर जनता और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए छोटी मोटी कार्रवाई करके खानापूर्ति की जा रही है।
सांगानेर की पहचान और पर्यावरण को बचाने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है। बिना लैंड कन्वर्जन और बिना पॉल्यूशन क्लियरेंस के चल रही सभी अवैध इकाइयों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया जाना चाहिए और धरती को दूषित करने वाले संचालकों पर आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए। इसके साथ ही जो उद्यमी नियमानुसार और बिना प्रदूषण फैलाए काम करना चाहते हैं, उनके लिए सरकार विशेष सुविधाएं और वित्तीय सहायता देकर उन्हें वैध तरीके से काम करने का अवसर प्रदान करे। सांगानेर के हर उद्योग को सेंट्रलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाना बेहद जरूरी है ताकि एक बूंद भी केमिकल युक्त पानी धरती मां के सीने में न उतर सके।

