हा, असीं सिंधी आहियूं
सिंधी हुजण ते फख्र: हिक अज़ीम सफर
एपिसोड 10: मिरखशाह का पागलपन – खौफ से उपजा खूनी आदेश
सिंधु तट पर हुई उस दिव्य आकाशवाणी की गूँज ने ठट्टा के महल की बुनियादें हिला दी थीं। मिरखशाह के लिए यह केवल एक सूचना नहीं थी, बल्कि उसके वजूद के अंत की घोषणा थी। जैसे-जैसे यह खबर पुख्ता होती गई कि दरिया शाह ने रतनराय ठकूर के घर जन्म लेने का वचन दिया है, मिरखशाह की बोखलाहट एक हिंसक पागलपन में बदल गई। उसका डरा हुआ चेहरा, जो कभी अहंकार से तमतमाया रहता था, अब पीला पड़ चुका था और उसकी आँखों में मौत का साया साफ तैर रहा था। वह सिंहासन पर एक पल भी शांत नहीं बैठ पा रहा था; कभी वह अपनी तलवार को म्यान से बाहर खींचता, तो कभी अपने ही मंत्रियों पर चिल्लाने लगता। उसकी यह छटपटाहट उसके दरबारियों को यह बता रही थी कि वह अधर्मी सम्राट भीतर से पूरी तरह टूट चुका है।
अपनी इसी बोखलाहट में मिरखशाह ने इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक क्रूर फैसला लिया। उसने अपने वजीरों और गुप्तचरों को दरबार में बुलाकर कड़कती आवाज़ में हुक्म दिया कि, “इससे पहले कि वह बालक इस धरती पर कदम रखे, नसरपुर की उस दिशा से आने वाली हर साँस को रोक दिया जाए!” उसने आदेश दिया कि रतनराय ठकूर के परिवार को तो मिटाना ही है, लेकिन साथ ही पूरे क्षेत्र में हर गर्भवती महिला और हर उस परिवार को खत्म कर दिया जाए जहाँ किसी भी पल शिशु के जन्म की संभावना हो। मिरखशाह का यह डर इतना गहरा था कि वह एक अजन्मे बालक को मारने के लिए पूरे सिंध को लहूलुहान करने पर उतारू हो गया था। उसे लग रहा था कि अगर वह मासूमों का खून बहाएगा, तो शायद वह उस दैवीय शक्ति को आने से रोक पाएगा।
महल के भीतर अब केवल खौफ का राज था। मिरखशाह अपने गुप्तचरों के जत्थों को दिशा-निर्देश देते समय खुद कांप रहा था, लेकिन उसका गुस्सा उसकी कायरता को ढकने की कोशिश कर रहा था। उसने कसम खाई कि वह रतनराय ठकूर के घर की एक ईंट से ईंट बजा देगा और उस कुल का नामोनिशान मिटा देगा। उसकी यह तड़प और बोखलाहट इस बात का प्रमाण थी कि सत्य की एक भविष्यवाणी ने उसके पूरे सत्ता-तंत्र को बेबस कर दिया था। वह एक ऐसा शिकारी बन चुका था जो खुद ही शिकार होने के डर से हर दिशा में अपनी तलवार चला रहा था। मिरखशाह का यह खूनी संकल्प सिंध के उस काले दौर की शुरुआत थी, जहाँ एक तरफ बादशाह का पागलपन था और दूसरी तरफ रतनराय ठकूर के घर होने वाले उस ईश्वरीय चमत्कार की अटूट प्रतीक्षा।
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