जयपुर / नई दिल्ली (विशेष रिपोर्ट): राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण और कपड़ा उद्योग से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के Court 02 ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान बोर्ड के ढुलमुल और अड़ियल रवैये पर भारी नाराजगी जताते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि नियम-कायदों की आड़ में उद्योगों के काम में बेवजह अड़चनें डालना तुरंत बंद किया जाए। अदालत ने बोर्ड के पास लंबित पड़े इंडिविजुअल एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (ETPs) के आवेदनों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि उद्योगपति नियमों का पालन करने के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन बोर्ड उन्हें क्लियर करने के बजाय हाइपर-टेक्निकल बहाने बनाकर अटका रहा है। पीठ ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल उद्योगों के कामकाज में अनावश्यक रुकावटें पैदा कर रहा है। अदालत ने बोर्ड को अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक इन आवेदनों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो सुप्रीम कोर्ट प्रदूषण मंडल से सारा अधिकार छीनकर मामला एक स्वतंत्र समिति को सौंप देगा। सुनवाई के दौरान जब राज्य सरकार के प्रतिनिधि ने पक्ष रखते हुए कहा कि कंपनियां जिस नई MBR (Membrane Bioreactor) तकनीक का प्रस्ताव दे रही हैं, वह बहुत अधिक ऊर्जा खपत वाली है और केवल अत्यधिक डिस्चार्ज करने वाली बड़ी इकाइयों के लिए ही व्यावहारिक है, तो अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि उद्योगपति स्वयं तकनीक का खर्च उठाने और इसके संचालन के लिए सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करने को तैयार हैं, तो बोर्ड को इसमें आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अदालत का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की खपत का आकलन करना नहीं, बल्कि 'Zero Liquid Discharge' (ZLD) हासिल कर पर्यावरण की रक्षा करना है। यदि कोई भी आधुनिक तकनीक पर्यावरण को बचाने में सक्षम है, तो न्यायपालिका उसे बढ़ावा देगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि अब तक पर्यावरण को पहुँचाए गए नुकसान की भरपाई में कितनी ऊर्जा और संसाधन लगेंगे, इसका हिसाब पेश किया जाए। अदालत ने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) से जुड़ी समानांतर अवैध पाइपलाइनों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया और जांच एजेंसियों से पूछा कि आखिर लंबे समय से चल रही जांच के बावजूद इन अवैध पाइपलाइनों को अब तक सील क्यों नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करते हुए अवैध पाइपलाइनों को सील करने और इसकी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने के आदेश दिए। इसके अलावा, नदी क्षेत्र में 100 मीटर ईको-प्रोटेक्टेड ज़ोन के सीमांकन में बोर्ड द्वारा की गई गड़बड़ी पर भी सुधार के निर्देश दिए गए। अदालत ने पाया कि बोर्ड ने नदी के केंद्र से पैमाइश करके गलती की है, जिसे अब सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार 'ड्राई फ्लो' (शुष्क प्रवाह) के नियमों के आधार पर दोबारा नापकर सही रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 29 सितंबर 2026 तय की है। अदालत ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को ETP आवेदनों पर सकारात्मक कार्रवाई करने तथा नेशनल प्रॉडक्टिविटी काउंसिल (NPC) की 2010 की रिपोर्ट सहित सभी विवादित बिंदुओं पर ठोस व स्पष्ट जवाब पेश करने का अंतिम निर्देश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान प्रदूषण मंडल को कड़ी फटकार: उद्योगों का काम अटकाना बंद करें, वरना पावर छीनकर कमेटी को सौंप देंगे
22 सितंबर 2026 को 6:42 pm बजे

सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान प्रदूषण मंडल को कड़ी फटकार: उद्योगों का काम अटकाना बंद करें, वरना पावर छीनकर कमेटी को सौंप देंगे
