हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय (पार्षद) चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न चर्चाएं जारी हैं। भांकरोटा मंडल में दो सीटों पर जीत और दो सीटों पर मिली हार को लेकर स्थानीय नेतृत्व की भूमिका और टिकट वितरण के फैसलों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी कड़ी में, भारतीय जनता पार्टी भांकरोटा मंडल से अनिल चौधरी के साथ एक विशेष बातचीत की गई। इस साक्षात्कार में उन्होंने पार्षद चुनावों के नतीजों का विश्लेषण करते हुए चुनाव परिणामों के पीछे के प्रमुख कारणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पार्टी के टिकट वितरण की प्रक्रिया, जातीय समीकरणों और विपक्षी दलों द्वारा धन-बल के प्रयोग जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। इसके साथ ही, अनिल चौधरी ने आगामी सांगानेर विधानसभा चुनावों को लेकर मंडल की भावी रणनीति और बूथ स्तर पर पार्टी की तैयारियों का पूरा खाका भी साझा किया।
संवाददाता: नमस्कार अनिल जी, कैसे हैं? अनिल चौधरी: नमस्ते, मैं बढ़िया, आप बताओ।
संवाददाता: वर्तमान जो पार्षद चुनाव गए, उसमें भांकरोटा मंडल का जो प्रदर्शन था निराशाजनक गया। दो वार्ड आपने जीते, दो वार्ड आपको हार मिली, आखिरकार इसके कारण क्या रहे?
अनिल चौधरी: देखो, हम इसको निराशाजनक नहीं मानते। पिछले चुनावों से हम तुलना करें या विधानसभा चुनाव से तुलना करें, उसके परसेंटेज जो देखें हम वोटों की, तो हम पहले के चुनावों से बहुत अच्छा प्रदर्शन यहाँ पार्टी ने किया है। पार्टी के कैंडिडेटों को जो वोट हैं, वो अच्छे मिले हैं। हां, कुछ मतों से हम दो सीटों पर रह गए, लेकिन दो सीटों पर जो हम जीते हैं, वहाँ जीत का अंतर बहुत अच्छा रहा, ऐतिहासिक जीतों का अंतर रहा है।
संवाददाता: भंवर लाल जी पूर्व पार्षद रह चुके हैं। पार्षद रहने के बाद जब वो चुनाव लड़े हैं, तो एक बड़े अंतर से 3400 वोटों से वो हार गए। फिर उसके बाद में वर्तमान में पार्टी ने, पार्टी ने उसमें क्या देखा, जो आप लोगों के द्वारा ऐसे कैंडिडेट को टिकट दे दी गई?
अनिल चौधरी: देखो, पार्टी जो टिकट देती है, टिकट देने के पीछे कई कारण होते हैं। पार्टी के कई जो वरिष्ठ नेतृत्व होते हैं, पदाधिकारी होते हैं, वो सारी कमेटी बैठकर सोचती है, निर्णय लेती है। वहाँ के लोकल कार्यकर्ताओं से भी सर्वे किया जाता है, एजेंसियों से भी सर्वे किया जाता है। उसके आधार पर पार्टी को जो उचित लगा, उस आधार पर उनको टिकट दिया। पुराने रिकॉर्ड के आधार पर टिकट नहीं मिलता, वर्तमान में क्या स्थिति है, उसके आधार पर उनको टिकट मिला। और वो एक जिताऊ कैंडिडेट थे... लेकिन हो सकता है कहीं न कहीं जैसे लोगों के बीच में पहुँचने का जो समय कम मिला, इस वजह से वो लोगों के...
संवाददाता: मुकेश काका के खिलाफ भी एंटी-इंकंबेंसी थी इस क्षेत्र के अंदर?
अनिल चौधरी: ऐसी कोई एंटी-इंकंबेंसी नहीं थी। यहाँ का चुनाव जो है, मुझे यह लगा है कि कुछ न कुछ जातिवाद पे या धन बल के दुरुपयोग के आधार पर लड़ा गया है। तो इस आधार पर कुछ न कुछ हम थोड़े से वोटों से पीछे रह गए। बाकी मुकेश काका ने बहुत अच्छी मेहनत की, अच्छा चुनाव लड़ा।
संवाददाता: भविष्य को लेकर आपकी क्या रणनीति है?
अनिल चौधरी: अब भविष्य में हमारी रणनीति यह है कि दो-सवा दो साल बाद में विधानसभा चुनाव होने हैं। भांकरोटा मंडल, जो सांगानेर विधानसभा जहाँ से स्टार्ट होती है, होती है 1 नंबर बूथ, उस बूथ से लेकर हमारे जितने बूथ हैं, हम यह चाह रहे हैं, हमारा यह विज़न है कि माननीय मुख्यमंत्री जी जब दोबारा यहाँ से चुनाव लड़ें, तो पूरे सांगानेर विधानसभा में अच्छे मार्जिन से हम हमारे मंडल से उनको जीताकर भेजें।

