विशेष रिपोर्ट | जयपुर (सांगानेर) सांगानेर सदर थाना क्षेत्र के गाँव गवार ब्राह्मणान (ग्वार ब्राह्मणान) में अवैध रूप से संचालित रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों, उनके रासायनिक बदबूदार पानी और फैक्ट्री मालिकों की कथित दबंगई से त्रस्त होकर सैकड़ों ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने सांगानेर सदर थाने पहुँचकर पुलिस प्रशासन को परिवाद पत्र सौंपा और 10 नामजद फैक्ट्री संचालकों व उनके अवैध संगठन के खिलाफ मामला दर्ज कर तुरंत कार्रवाई की माँग की।
130 से अधिक अवैध फैक्ट्रियां, 100 फीट गहरा गड्ढा और प्राचीन बाँध की पाल तोड़ी
इंटरव्यू में गाँव के चेतन मीणा और मोहनलाल शर्मा ने खुलासा किया कि इलाके में बिना अनुमति 130 से 135 अवैध फैक्ट्रियां बेधड़क चल रही हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि: अवैध पंपिंग स्टेशन: गाँव के बीचों-बीच हाईटेंशन लाइन के नीचे जहरीला और गंदा पानी इकट्ठा करने के लिए अवैध रूप से पंपिंग हाउस बनाया जा रहा है, जिसके लिए करीब 100 फीट गहरा खतरनाक गड्ढा खोदा गया है।
धरोहर और सड़कों को नुकसान:
गंदे पानी की पाइपलाइन बिछाने के लिए गाँव की करीब 200 वर्ष पुरानी प्राचीन बाँध की पाल को तोड़ा जा रहा है तथा हाल ही में बनी पक्की सीसी रोड को उखाड़ा जा रहा है।
चर्म रोग, दवाइयाँ और गाँव से पलायन का खौफ
प्रदूषित पानी और रसायनों के कारण गाँव के भूजल और पर्यावरण पर जानलेवा असर पड़ा है।
थाने पहुँचे ग्रामीणों ने अपने शरीर पर हुई एलर्जी और डॉक्टरों द्वारा दी जा रही दवाइयों के पर्चे व गोलियों के पत्ते मीडिया को दिखाए।
ग्रामीणों का कहना है कि "मानपुरिया और शिकारपुरा में जो दुर्दशा हुई है, वही हाल अब हमारे गाँव का किया जा रहा है।"
फैक्ट्री चालकों के खौफ और प्रदूषण की वजह से गाँव से पहले ही 10 से 20 परिवार अपना घर-बार छोड़कर पलायन कर चुके हैं।
06 और 07 अक्टूबर को मारपीट, जातिसूचक शब्द और धमकियां
पुलिस को दी गई शिकायत और ग्रामीणों के बयान के अनुसार: 06 अक्टूबर (शाम 4 बजे): निर्माणाधीन पंपिंग स्टेशन का विरोध करने पर फैक्ट्री मालिकों और उनके गुर्गों ने गाँव वालों के साथ अभद्रता की, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और जान से मारने की धमकी दी।
07 अक्टूबर (सुबह 8 बजे): करीब 500 फैक्ट्री वाले गाड़ियों का हुजूम बनाकर आए और जबरन बिजली का पोल व ट्रांसफॉर्मर लगाकर कनेक्शन चालू करने की कोशिश की। विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ हाथापाई और मारपीट की गई, जिससे बचने के लिए ग्रामीणों को वापस भागना पड़ा।
"नेता और प्रशासन हमारी जेब में"- फैक्ट्री मालिकों पर संगीन आरोप
ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जब वे विरोध करते हैं, तो फैक्ट्री मालिक धमकी देते हैं कि "नेता तुम्हारा सपोर्ट नहीं करेंगे, उनके चुनाव हमारे पैसों से लड़ते हैं।" यहाँ तक कि ग्रामीणों को गाँव खाली करने या फैक्ट्रियों के आगे झुकने की धमकियाँ दी जाती हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर भविष्य में किसी भी गाँव वाले के साथ कोई अप्रिय घटना या जनहानि होती है, तो उसका सीधा जिम्मेदार स्थानीय प्रशासन और ये फैक्ट्री संचालक होंगे।

