करोड़ों की दुकानें धरातल पर बनीं कचरा-घर; आवंटी सड़क पर बैठने को मजबूर, कागजों में फल-फूल रहा फर्जी कारोबार
मंडी प्रशासन की घोर लापरवाही से सेकंड फेज बना असामाजिक तत्वों का अड्डा; डोम न होने से 11 सालों से वीरान पड़ी हैं दुकानें
जयपुर (विशेष संवाददाता)। राजधानी की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी का 'सेकंड फेज' आज प्रशासन की आपराधिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बन चुका है। जिस परिसर को राजस्थान के बड़े व्यापारिक हब के रूप में विकसित होना था, वह आज 'मुहाना कच्ची बस्ती' और असामाजिक तत्वों की शरणस्थली में तब्दील हो चुका है। करोड़ों रुपये खर्च कर दुकानें बनाने वाले वैध आवंटी आज फुटपाथ पर बैठने को मजबूर हैं, जबकि धरातल पर दुकानें बंद रखकर कागजों के भीतर करोड़ों का फर्जी कारोबार संचालित किया जा रहा है।
आशियाना बनी दुकानें, चूल्हे जल रहे और सूख रहे कपड़े
ग्राउंड ज़ीरो से सामने आई तस्वीरों और जमीनी निरीक्षण से चौंकाने वाला सच उजागर हुआ है। दुकानों (जैसे D-299) का निर्माण व्यापार के लिए हुआ था, लेकिन शटर, दरवाजे और सुरक्षा न होने के कारण यहाँ अनधिकृत लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं। अधबनी इमारतों में चूल्हे जल रहे हैं, छतों और बाल्कनियों पर कपड़े सूख रहे हैं और खुले पड़े बेसमेंट हादसों को न्योता दे रहे हैं। व्यापारिक केंद्र अब पूरी तरह रिहाइशी अवैध बस्ती का रूप ले चुका है।
'दुकान F-71 का माल सड़क पर बेचने को मजबूर' — आवंटी का छलका दर्द
'सिंधु चौपाल' की टीम ने जब ग्राउंड ज़ीरो पर पड़ताल की, तो दुकान नंबर F-71 के आवंटी व्यापारी रामअवतार साहू ने मंडी प्रशासन की पोल खोलकर रख दी।
व्यापारी रामअवतार साहू ने बताया:
"हमारी दुकान नंबर F-71 है और सारा माल इसी नाम से आता है। लेकिन हम मजबूरी में बाहर सड़क पर बैठकर व्यापार कर रहे हैं। 2015-16 में दुकानें बनी थीं, 10-11 साल से यह परिसर कचरा बना पड़ा है। यहाँ न डोम है, न बिजली-पानी और न सुरक्षा। रात को दारूबाज़ आते हैं, ताले तोड़ते हैं और दुकानों में रखा सामान चोरी कर ले जाते हैं। बिना लाइसेंस वाले सड़क पर कब्जा जमाकर कमाई कर रहे हैं और हम वैध आवंटी सड़क पर धक्के खाने को मजबूर हैं।"
डोम' (Dome) का न होना बना बर्बादी की मुख्य वजह
व्यापारियों का साफ कहना है कि सेकंड फेज के ठप होने का सबसे बड़ा कारण प्रशासन द्वारा शेड/डोम (Dome) का निर्माण न कराना है। बिना डोम के खुले आसमान के नीचे लाखों रुपये की फल-सब्जियों को धूप और बारिश से बचाना असंभव है। जब तक पूरा मार्केट एक साथ यहाँ नहीं बैठेगा, कोई एक व्यापारी अकेला आकर दुकान नहीं चला सकता।
कागजी कारोबार और भ्रष्टाचार का बड़ा खेल
सूत्रों का दावा है कि सेकंड फेज की इन वीरान दुकानों के नाम पर कागजों में बड़ा कारोबार दिखाया जा रहा है, जबकि धरातल पर व्यापारी मुख्य मंडी के प्लेटफॉर्मों पर भारी किराया देकर या सड़कों पर बैठकर काम कर रहे हैं। प्रशासन की शह पर बिना लाइसेंस वाले लोग अवैध रूप से व्यापार कर रहे हैं और असली आवंटी खून के आँसू रो रहे हैं।
व्यापारियों का अल्टीमेटम और मुख्य माँग:
मंडी व्यापारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने की माँग की है:
डोम/शेड का तत्काल निर्माण: सेकंड फेज में तुरंत डोम लगाया जाए ताकि व्यापारी सुरक्षित रूप से शिफ्ट हो सकें।
अवैध कब्जे और अतिक्रमण पर बुलडोजर: दुकानों में अनधिकृत रूप से रह रहे लोगों और बिना लाइसेंस व्यापार करने वालों को तुरंत खदेड़ा जाए।
सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएँ: परिसर में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, ताले तोड़ने वाले चोरों पर कार्रवाई हो और सीवरेज-पानी की व्यवस्था बहाल की जाए।
एकमुश्त शिफ्टिंग: सभी आवंटियों को एक साथ सेकंड फेज में बिठाकर व्यापार शुरू करवाया जाए।

