जयपुर। सांगानेर क्षेत्र में संचालित कपड़ा रंगाई-छपाई और प्रिंटिंग फैक्ट्रियों से निकलने वाला रासायनिक व दूषित जल आसपास के ग्रामीण इलाकों और पर्यावरण के लिए एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और न्यायालय के सख्त निर्देशों के बावजूद कई इकाइयाँ धड़ल्ले से नियमों की धज्जियाँ उड़ा रही हैं। स्थानीय नालों के ज़रिए यह ज़हरीला पानी सीधे मुहाना स्थित ऐतिहासिक 'मोहन सागर तालाब' में गिराया जा रहा है, जिससे न केवल क्षेत्र का जलस्तर दूषित हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
फैक्ट्री संचालकों के दावों की खुली पोल
ग्राउंड ज़ीरो से की गई विशेष पड़ताल के दौरान सांगानेर स्थित 'मुस्कान प्रिंट' जैसी कई इकाइयों में नियम-कायदों का सरेआम उल्लंघन देखने को मिला।
खुले नालों में बहाया जा रहा पानी:
फैक्ट्री में कार्यरत कर्मचारियों से जब सवाल किए गए, तो उन्होंने स्वीकार किया कि फैक्ट्री का गंदा और केमिकलयुक्त पानी सीधे खुले नालों में बहाया जा रहा है।
कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन:
बाहर 'अदालत के आदेशानुसार कार्य बंद' का बोर्ड लटकाने के बावजूद अंदर गुपचुप तरीके से फैक्ट्रियाँ संचालित की जा रही हैं।
कर्मचारियों ने कैमरे पर स्वीकार किया कि बंद पड़ी इकाइयों को दोबारा चालू कर ज़हरीला पानी खुले में छोड़ा जा रहा है।
मोहन सागर तालाब हुआ ज़हरीला, जलस्रोत तबाह
सांगानेर से बहकर आने वाला यह केमिकल युक्त पानी मुहाना मंडी के पास स्थित ऐतिहासिक मोहन सागर तालाब में एकत्र हो रहा है। कभी स्वच्छ जल का स्रोत रहा यह तालाब आज दूषित और दुर्गंधयुक्त नाले के रूप में तब्दील हो चुका है।
फैक्ट्रियों से निकलने वाले विषैले रसायनों और आसपास के गंदे नालों का पानी लगातार मोहन सागर में समाहित हो रहा है, जिससे क्षेत्र का पर्यावरण पूरी तरह गंदा और प्रदूषित हो चुका है।
बीमारियों के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण
मुहाना और आसपास के निवासियों का कहना है कि लंबे समय से वे इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका की ओर से सफाई या रोकथाम की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।
"सांगानेर की फैक्ट्रियों का केमिकल का पानी मोहन सागर में मिल रहा है। दूषित वातावरण और गंदगी की वजह से हमारे बच्चे आए दिन बीमार पड़ते हैं। सरकार और प्रशासन को तुरंत इस पर ध्यान देना चाहिए।"
— धर्मराज वाल्मीकि, स्थानीय निवासी
"यह तालाब कभी पीने के पानी का जरिया हुआ करता था, लेकिन अब फैक्ट्रियों का केमिकल और गंदा पानी इसमें बहकर आ रहा है। पूरे इलाके में भारी गंदगी और बीमारियाँ फैल रही हैं।"
— रामसिंह, स्थानीय निवासी
"सालों से यह समस्या बनी हुई है। सांगानेर से आने वाला यह ज़हरीला पानी नालों के ज़रिए सीधे मोहन सागर तालाब को तबाह कर रहा है।"
— रामपाल, स्थानीय निवासी
प्रशासनिक चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल
क्षेत्रवासियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन को बार-बार सूचित करने के बावजूद आज तक यहाँ सफाई का कोई कार्य नहीं हुआ है।

