जयपुर (विशेष संवाददाता)। विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प और कपड़ा रंगाई-छपाई के सिरमौर कहे जाने वाले जयपुर के सांगानेर का कपड़ा उद्योग इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े कानूनी, नैतिक और प्रशासनिक संकट के दौर से गुजर रहा है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RPCB), कोर्ट के क्लोजर नोटिस और ₹130 करोड़ से अधिक के CETP प्रोजेक्ट में धांधली के बीच सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन के अंदरूनी कलह ने पूरे मामले को एक संवेदनशील मोड़ दे दिया है।
'स्वतंत्र टॉक' (Swatantra Talk) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन के 25 वर्षों से अध्यक्ष देवी शंकर खत्री ने उद्योग के अंदरूनी कड़वे सच, सीएम कैंप में हुई मीटिंग का नाटक, प्रशासनिक नाकामी और गुटबाजी पर बड़ा खुलासा किया है।
. 'CM कैंप का ड्रामा': अफसरों ने एक-एक करके मांगे इस्तीफे!
साक्षात्कार का सबसे विस्फोटक मोड़ तब आया जब देवी शंकर खत्री ने 6 महीने पहले CM कैंप में हुई उस बैठक का वाकया सुनाया, जिसने पूरी एसोसिएशन के स्वाभिमान को ठेस पहुँचाई:
प्रवीन शाह का एकाधिकार: मीटिंग में बड़े अधिकारियों और RO साहब की मौजूदगी में प्रवीन शाह से पूछा गया कि क्या वे सीटीपी (CETP) चलाएंगे? प्रवीन ने कहा कि वे अकेले चलाएंगे लेकिन उन्हें पुराने चार बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स नहीं चाहिए, उन्हें हटाया जाए।
इस्तीफा देने का दबाव: खत्री जी के अनुसार, उसी क्षण अधिकारी ने उनसे कहा—"खत्री, आप पहले इस्तीफा दो!" खत्री जी ने जब बताया कि वे साल भर पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं, तब भी दबाव बनाया गया।
डायरेक्टर्स का अपमान: इसके बाद फोन करके राजेंद्र जीगर, दिनेश, चंद्र और राज्य सरकार में अच्छा असर रखने वाले नवरतन नारानिया तक से इस्तीफे मांग लिए गए। खत्री जी ने कहा:
"हमारे साथ कितनी ज्यादती और अपमान हुआ है, यह कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता! सबकी इज्जत नीलाम कर दी गई ताकि एक व्यक्ति 'वन मैन शो' चला सके।"
"प्रवीन शाह से मैं भी डरता हूँ, वो बॉस हैं!" — एसोसिएशन में दो फाड़
सांगानेर एसोसिएशन में गुटबाजी और तीखी रार इस कदर बढ़ चुकी है कि खत्री जी ने तंज कसते हुए कहा:
"प्रवीन शाह ने अब पूरी कमान संभाल ली है, उससे सब डरते भी हैं और हम भी डरते हैं... ही इज अवर बिग बॉस! लेकिन हकीकत यह है कि ग्वार क्षेत्र स्थित उनकी खुद की फैक्ट्री अब तक सीटीपी पाइपलाइन से जुड़ी ही नहीं है।"
उन्होंने खुलासा किया कि एसोसिएशन में 'तेरा-मेरा' का खेल चल रहा है। पिछले दिनों हुई AGM मीटिंग में स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि केवल हाथापाई होना बाकी रह गया था, कुर्सी और अधिकार को लेकर भयंकर लड़ाई हुई।
₹130 करोड़ फूंक दिए, फिर भी सड़कों पर बह रहा है 10 MLD जहर!
सांगानेर में जल प्रदूषण निवारण के नाम पर अब तक करीब ₹130 से ₹132 करोड़ खर्च हो चुके हैं (जिसमें 50% केंद्र सरकार, 25% राज्य सरकार और 25% SPV का पैसा लगा है)। इसके बावजूद जमीनी हकीकत भयावह है:
कुल निकास पानी: सांगानेर की इकाइयों से रोजाना 12 MLD रसायनों से भरा दूषित पानी निकलता है।
ट्रीटमेंट क्षमता: इसमें से सिर्फ 1.5 से 2 MLD पानी ही ट्रीट हो पा रहा है।
सड़कों और बांधों में जहर: बाकी 10 MLD गंदा पानी रोजाना सड़कों, नालों और चंदलाई व मोरेल बांधों में जाकर कृषि और भूजल को तबाह कर रहा है।
कांट्रेक्टर की धोखाधड़ी: एडवेंट एनवायरनमेंट नामक कांट्रेक्टर कंपनी पर आरोप लगाया कि उसने बिना काम किए, बिना मटेरियल लगाए बैंक गारंटी और फर्जी बिलों के दम पर ₹8 करोड़ का एक्स्ट्रा भुगतान उठा लिया और काम अधूरा छोड़कर भाग गया।
सांगानेर की साख पर धब्बा: टेंडर निकालने पर भी कोई आने को तैयार नहीं
एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने साक्षात्कार में बताया कि सांगानेर का नाम सुनते ही मार्केट में कोई ठेकेदार या पीएमए (PMA) काम लेने को तैयार नहीं होता:
"हमने O&M और PMA के लिए बड़े अखबारों में लाखों रुपये खर्च करके विज्ञापन दिए, लेकिन सिर्फ 3 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई। वो भी तब जब हमने उन्हें व्यक्तिगत फोन करके पैसों की गारंटी दी।"
द्रव्यवती नदी नहीं, 'अमानिशाह का नाला' है — सांगानेर अकेला जिम्मेदार नहीं!
सांगानेर उद्योग को अकेले दोषी ठहराए जाने पर खत्री जी ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिसे द्रव्यवती नदी कहकर सांगानेर को बदनाम किया जाता है, वह असल में अमानिशाह नाला है:
"इसमें जयपुर के 7 बड़े औद्योगिक क्षेत्रों (विश्वकर्मा, झोटवाड़ा, 22 गोदाम, सोडाला, सुदर्शन आदि) का केमिकल-ऑयल युक्त पानी और पूरे जयपुर शहर का सीवरेज गिरता है। लेकिन सारा दोष और बदनामी केवल सांगानेर के कपड़ा उद्योग के सिर मढ़ दी जाती है।"
हाई-टेंशन लाइन के नीचे पंपिंग स्टेशन और एफआईआर की तलवार
सांगानेर में बना तीसरा पंपिंग स्टेशन हाई-टेंशन बिजली लाइन के ठीक नीचे बना दिया गया है, जिस पर प्रशासन की तरफ से एफआईआर (FIR) दर्ज होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा ग्वार गांव क्षेत्र में बिना परमिशन के पाइपलाइन डालने और नियमों की अनदेखी करने का मामला भी तूल पकड़ रहा है।
समाधान का रोडमैप: 'बड़ी फैक्ट्रियां खुद का ZLD प्लांट लगाएं'
उद्योग को क्लोजर से बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए देवी शंकर खत्री ने निम्नलिखित रोडमैप दिया:
इंडिविजुअल ZLD प्लांट: सभी बड़ी कपड़ा प्रिंटिंग इकाइयों को अपने-अपने परिसरों में व्यक्तिगत ZLD (Zero Liquid Discharge) प्लांट लगा लेने चाहिए ताकि पानी वहीं रीसायकल होकर दोबारा काम आ सके।
प्राइमरी ETP चालू करना: यदि सभी 900 इकाइयां अपना-अपना ईटीपी (ETP) सही से चलाएं, तो 50% प्रदूषण समस्या का समाधान तुरंत हो जाएगा।
एकजुटता की भावुक अपील: खत्री जी ने कहा कि "तूफान के बाद हरियाली भी आती है।" वे अपने 27 साल पुराने परिवार (एसोसिएशन) को बिखरने नहीं देंगे और मुख्यमंत्री जी से मिलकर सांगानेर को एक स्वच्छ 'क्राफ्ट विलेज' बनाने का प्रयास जारी रखेंगे।

