जयपुर/सांगानेर। राजधानी के प्रमुख औद्योगिक और कपड़ा छपाई केंद्र सांगानेर में सालों से सड़कों पर बहते केमिकल युक्त जहरीले पानी और सीवर ओवरफ्लो की समस्या पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RPCB) ने बेहद सख्त और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। बोर्ड ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा 33A का इस्तेमाल करते हुए सांगानेर कपड़ा रंगाई छपाई एसोसिएशन (SKRCA) और सांगानेर एनवायस प्रोजेक्ट डेवलपमेंट (SEPD) को अंतिम अल्टीमेटम जारी कर दिया है। RPCB के अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता अमित शर्मा द्वारा जारी इस कड़े आदेश ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। आदेश में साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि अगर नियमों में थोड़ी सी भी ढिलाई या समय-सीमा से विचलन हुआ तो जिम्मेदारों और दोषी इकाइयों को सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी।
12.30 MLD का प्लांट और सिर्फ 1-2 MLD का संचालन, बोर्ड का फूटा गुस्सा
प्रदूषण बोर्ड की जांच और बैठकों के दौर में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि सांगानेर में कपड़ा इकाइयों के जहरीले पानी के उपचार के लिए 12.30 MLD क्षमता का विशाल CETP (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) मौजूद होने के बावजूद इसे सिर्फ 1 से 2 MLD क्षमता पर घसीटा जा रहा था। प्लांट के इस लचर संचालन के कारण मैनहोलों से केमिकल युक्त अपशिष्ट जल उफनकर सड़कों पर बह रहा था और आम जनता का जीना मुहाल हो चुका था। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि जल अधिनियम 1974 की धारा 24 के तहत नालों, सीवर या खुली जमीन पर विषैला पानी बहाना संगीन अपराध है और अब इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अवैध पानी बहाया तो दर्ज होगी FIR, तुरंत रद्द होगी फैक्ट्री की सदस्यता
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नए निर्देशों ने लापरवाही बरतने वाली कपड़ा इकाइयों पर शिकंजा कस दिया है। बोर्ड ने आदेश दिया है कि CETP की कंड्यूट लाइनों या नालियों में अवैध रूप से केमिकल युक्त पानी बहाने वाली किसी भी फैक्ट्री या संस्था के खिलाफ तुरंत पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी। इतना ही नहीं, अगर कोई इकाई निर्धारित 'रोटेशनल बंदी' योजना का उल्लंघन करती पाई गई, तो एसोसिएशन तुरंत उसकी सदस्यता समाप्त करेगी और क्षेत्रीय अधिकारी (RSPCB, जयपुर दक्षिण) उस इकाई पर पक्की तालाबंदी की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। SKRCA को अपनी सभी सदस्य इकाइयों पर 24 घंटे बाज जैसी पैनी नजर रखने का जिम्मा सौंपा गया है ताकि कोई भी चोरी-छिपे बायपास या अवैध डिस्चार्ज न कर सके।
10 और 15 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम: SCADA मीटर से लेकर विशेषज्ञ एजेंसी तक की डेडलाइन तय
बोर्ड ने पूरे तंत्र को सुधारने के लिए समय-सीमा का चक्रव्यूह रच दिया है। आदेश के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2026 तक सभी सदस्य इकाइयों में पानी के बहाव पर डिजिटल निगरानी रखने के लिए SCADA फ्लो मीटर लगाने का एक्शन प्लान पेश करना होगा। इसी तारीख तक CETP के स्थायी संचालन और अपग्रेडेशन के लिए चुनी गई विशेषज्ञ एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, 15 अक्टूबर 2026 तक ब्राह्मणों की ग्वार व आसपास की शेष 134 इकाइयों को हर हाल में CETP से जोड़कर PS-III की कमीशनिंग पूरी करनी होगी। इसके साथ ही पूरी पाइपलाइन और मैनहोलों का नियमित इंस्पेक्शन कर लीकेज की हर गुंजाइश खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।
धारा 45(E) के तहत होगी कठोर कानूनी कार्रवाई और जेल
प्रदूषण बोर्ड ने अपने आदेश के अंत में सबसे खतरनाक चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि तय समय-सीमा का उल्लंघन करने या निर्देशों को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश को जल अधिनियम की धारा 25/26 का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। इसके तहत दोषियों पर जल अधिनियम 1974 की धारा 45(E) के तहत कठोर दंडात्मक कानूनी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। बोर्ड की इस आर-पार की कार्रवाई से सांगानेर के कपड़ा उद्योगपतियों और CETP संचालकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस बार बोर्ड केवल कागजी नोटिस देने के मूड में नहीं है बल्कि सीधे फैक्ट्रियां सील करने और कानूनी शिकंजा कसने के लिए मैदान में उतर चुका है।

