जयपुर (विशेष संवाददाता):
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सांगानेर स्थित M/s Sanganer Enviro Project Development (SEPD) प्लांट पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) ने कड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। बोर्ड मुख्यालय द्वारा जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33A के तहत कार्यवाही करते हुए SEPD पर ₹20,16,000 (बीस लाख सोलह हजार रुपये) का भारी-भरकम पर्यावरण मुआवजा (Environmental Compensation) जमा कराने का कड़ा आदेश जारी किया गया है। बोर्ड के अपर मुख्य पर्यावरण इंजीनियर अमित शर्मा द्वारा जारी इस आदेश पत्र (क्रमांक F.14/CETP-Sanganer-18/RPCB/CETP/850-854) के अनुसार यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत 'Polluter Pays' (प्रदूषण फैलाने वाला ही भुगतान करेगा) सिद्धांत पर की गई है।
सांगानेर के मुहाना रोड, खसरा नंबर 37, गांव-मदरामपुरा स्थित 12.30 MLD क्षमता के इस कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) को बोर्ड द्वारा 02 जून 2025 को संचालन सहमति (CTO) प्रदान की गई थी। इससे पूर्व 03 अप्रैल 2026 को बोर्ड ने CETP को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए थे—जिसमें ब्राह्मणों की ग्वार में पंपिंग स्टेशन-III की स्थापना व 31 मई 2026 तक पाइपलाइन का काम पूरा करना, सभी सदस्य औद्योगिक इकाइयों को जोड़ना, सदस्यता प्रमाण पत्र जारी करना, ZLD सिस्टम (RO-I, RO-II, TMF व MVR) को पूरी क्षमता से चालू करना और 30 अप्रैल 2026 तक सहमति आवेदन जमा कराना शामिल था। हालाँकि, SEPD द्वारा इन निर्देशों पर कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद जब 01 जून 2026 को बोर्ड अधिकारियों द्वारा तथा 08 मई 2026 को JDA, JVVNL व RSPCB की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण किया गया, तो गंभीर तकनीकी कमियाँ और लापरवाही पाई गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, ब्राह्मणों की ग्वार में सब-पंपिंग स्टेशन और कनेक्टिविटी का काम तय समय सीमा तक पूरा नहीं हुआ था। प्लांट का केमिकल डोजिंग सिस्टम, बायोलॉजिकल टैंक (क्लैरीफायर सहित), कार्बन फ़िल्टर, क्लोरीनेशन सिस्टम, RO (प्रथम व द्वितीय चरण) और MVR बंद पड़े थे, जिससे पूरा CETP केवल आंशिक रूप से संचालित हो रहा था। TMF व MVR सिस्टम बंद होने के चलते पहले चरण का RO रिजेक्ट पानी वापस मेन पंपिंग स्टेशन (MPS) में भेजा जा रहा था। इसके अलावा, शुद्ध पानी की माप के लिए डिजिटल फ्लो मीटर गायब था, संचालन व केमिकल खपत का लॉगबुक रिकॉर्ड दर्ज नहीं था, तथा SCADA सिस्टम, ऑनलाइन मॉनिटरिंग (OCEMS) और PTZ कैमरे भी स्थापित नहीं मिले। संयंत्र के पास खतरनाक कचरा प्रबंधन (HWMR 2016) की मंजूरी नहीं थी, मुख्य द्वार पर अनिवार्य 4'x6' का डिस्प्ले बोर्ड नहीं लगा था और नेवटा फीडर कैनाल के पास 18 इंच की पाइपलाइन जुड़ी पाई गई। CETP को CTO की शर्त संख्या 16, 19, 23, 24, 25, 26, 27(a) और 28 का गैर-अनुपालक पाया गया।
जांच टीम द्वारा किए गए बिजली खपत सर्वे में सामने आया कि 12.30 MLD क्षमता वाले इस विशाल प्लांट को पूरी क्षमता पर चलाने के लिए प्रतिदिन लगभग 35,810.7 kWh (यानी लगभग 10.743 लाख kWh प्रति माह) बिजली की आवश्यकता होती है, जबकि JVVNL के बिलों के अनुसार औसतन खपत केवल 1.24 लाख kWh प्रति माह दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट प्रमाणित हुआ कि प्लांट अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार पानी का शोधन नहीं कर रहा था, जिससे पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुँच रहा था।
क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर (दक्षिण) द्वारा 01 जून 2026 से 06 जुलाई 2026 तक कुल 36 दिनों का गैर-अनुपालन दर्ज किया गया। बोर्ड ने ₹20,16,000 का जुर्माना तय किया गया। इस मामले में 23 जुलाई 2026 को SEPD को सुनवाई का अवसर दिया गया, लेकिन 29 जुलाई 2026 को प्रस्तुत उनका जवाब असंतोषजनक माना गया। सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के बाद बोर्ड ने SEPD को 60 दिनों के भीतर यह राशि डिमांड ड्राफ्ट के जरिए सदस्य सचिव, RSPCB के नाम क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर (दक्षिण) में जमा कराने का अंतिम आदेश दिया है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि 60 दिनों में राशि जमा न होने पर संचालन सहमति (CTO) तुरंत रद्द कर दी जाएगी, संस्था व उसके ट्रस्टियों पर अदालत में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, नया आवेदन स्वीकार नहीं होगा और 60 दिनों के बाद प्रति माह 1.5% की दर से अतिरिक्त विलंब शुल्क भी वसूला जाएगा।

