एपिसोड 1: आस्था की लहरों पर सवार – पल्ला मछली और सिंधी जज्बा

​हा, असीं सिंधी आहियूं

​सिंधी हुजण ते फख्र: हिक अज़ीम सफर

​एपिसोड 1: आस्था की लहरों पर सवार – पल्ला मछली और सिंधी जज्बा

​सिंधु नदी का जल केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि सिंधी समाज की रगों में बहने वाली चेतना है। इसी पावन जल के विस्तार में जन्म लेती है ‘पल्ला’ मछली, जो हमारी पहचान, हमारे संघर्ष और हमारी आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है। सिंधी समाज का इतिहास पल्ला मछली के बिना अधूरा है, क्योंकि यह केवल एक जलचर नहीं, बल्कि हमारे आराध्य वरुण अवतार भगवान श्री झूलेलाल जी का दिव्य वाहन है। जब-जब हम भगवान झूलेलाल जी की छवि को निहारते हैं, उन्हें पल्ला मछली पर सवार देखते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि हमारी शक्ति और हमारी गति दोनों ही ईश्वरीय सत्ता से जुड़कर विपरीत धाराओं पर विजय पाने की रही है।

​पल्ला मछली की प्रकृति में ही एक ऐसा अद्भुत संघर्ष छिपा है जो हर सिंधी के जीवन की कहानी कहता है। दुनिया की तमाम मछलियाँ पानी के बहाव के साथ बहकर अपनी राह आसान बनाती हैं, लेकिन पल्ला की फितरत इसके उलट है। वह सिंधु की उफनती लहरों को चीरती हुई, बहाव के विपरीत दिशा में मीलों का सफर तय करती है। ठीक इसी तरह, जब 1947 के विभाजन की लहर ने सिंधी समाज को अपनी जड़ों से उखाड़ने की कोशिश की, तो हमने हार नहीं मानी। हम पल्ला मछली की तरह उस विपरीत परिस्थिति से टकरा गए। हमने अपनी मातृभूमि खोई, अपनी संपत्ति छोड़ी, लेकिन अपने भीतर के उस ‘पल्ला’ जैसे जज्बे को नहीं खोया जिसने हमें राख से उठकर फिर से वैभव का नया अध्याय लिखने का साहस दिया।”

​भगवान श्री झूलेलाल जी का इस मछली को अपना वाहन चुनना कोई संयोग नहीं है। यह इस बात का संदेश है कि जो समाज संघर्ष से घबराता नहीं और धारा के विरुद्ध तैरने का साहस रखता है, परमात्मा सदैव उसके साथ होते हैं। पल्ला मछली खारे समंदर से निकलकर सिंधु के मीठे पानी की ओर बढ़ती है, जो इस बात का संकेत है कि चाहे जीवन में कितनी भी खाराश या कड़वाहट क्यों न आए, एक सिंधी का लक्ष्य हमेशा अपनी संस्कृति और व्यवहार की मिठास को बनाए रखना होता है। आज दुनिया भर में फैला सिंधी समाज अपनी व्यापारिक सूझबूझ और कामयाबी के झंडे गाड़ रहा है, तो उसके पीछे वही ईश्वरीय सवारी की गति काम कर रही है।

​आज जब हम गर्व से कहते हैं कि ‘असीं सिंधी आहियूं’, तो वह गर्व केवल धन-दौलत का नहीं, बल्कि उस विरासत का है जो हमें भगवान झूलेलाल जी के चरणों और पल्ला मछली की निरंतरता से मिली है। देश की सरहदों से लेकर विदेशों के बड़े व्यापारिक केंद्रों तक, सिंधी समाज ने अपनी मेहनत से यह सिद्ध कर दिया है कि जिसे स्वयं दरिया शाह का आशीर्वाद प्राप्त हो और जिसकी फितरत पल्ला मछली की तरह संघर्षमयी हो, उसे दुनिया की कोई भी ताकत आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। यह हमारा गौरवशाली सफर है, जहाँ हमारी आस्था ही हमारा संबल है और हमारा संघर्ष ही हमारी पहचान।

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Author: sindhuchaupal

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