संतों की अमृतवाणी और ऐतिहासिक शिलान्यास


जयपुर के मानसरोवर (वरूण पथ) की धरा शनिवार को भक्ति के रस में सराबोर हो गई, जब अमरापुर दरबार के स्वामी मोहनलाल प्रेमप्रकाशी जी महाराज (संत मोनूराम साईं जी) के कर-कमलों द्वारा 14 करोड़ की लागत से बनने वाले ‘भव्य झूलेलाल धाम’ की आधारशिला रखी गई। स्वामी जी ने अपने आशीर्वचन में समाज को सेवा का मार्ग दिखाते हुए कहा कि कलयुग में केवल सत्संग और सेवा ही जीवन को दुखों से पार लगा सकते हैं। वहीं, हरिद्वार में विराजमान सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने लाइव प्रसारण के माध्यम से पल्लव की अरदास की और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से इस भव्य प्रकल्प को अभिसिंचित किया। संतों के इस दिव्य सानिध्य ने समूचे सिंधी समाज को भक्ति और समर्पण के एक सूत्र में पिरो दिया।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के शुभकामना संदेश

इस ऐतिहासिक आयोजन की गरिमा तब और बढ़ गई जब प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी शुभकामनाओं के साथ समाज के इस कदम को सराहा। माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने अपने विशेष संदेश में कहा कि भगवान श्री झूलेलाल जी की शिक्षाएं हमें समरसता और भाईचारे की प्रेरणा देती हैं। वहीं, राजस्थान विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने अपने संदेश के माध्यम से पूज्य सिंधी पंचायत को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि यह धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए सिंधी संस्कृति और चेतना का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा। यह पावन संकल्प अब समाज की संगठित शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
आस्था और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा ‘मास्टर प्लान’

संस्था के अध्यक्ष ईश्वर करमानी, संरक्षक चन्दीराम जसवानी और महासचिव रवि हेमलानी ने इस भव्य धाम के निर्माण की रूपरेखा साझा की। लगभग 1997 वर्गमीटर में आकार लेने वाला यह परिसर आधुनिक स्थापत्य कला का चमत्कार होगा। यहाँ भव्य मंदिर और विशाल सत्संग हॉल के साथ-साथ एक सामाजिक संस्कार केंद्र और आधुनिक कम्युनिटी हॉल विकसित किया जाएगा। समाज के युवाओं के लिए एक कौशल विकास ज्ञान केंद्र और गौरवशाली अतीत को सहेजने के लिए सिंधी इतिहास का संग्रहालय एवं पुस्तकालय भी इस निर्माण का मुख्य हिस्सा होंगे। साथ ही, असहायों के लिए वृद्धाश्रम और यात्रियों के लिए धर्मशाला इसे सेवा का एक संपूर्ण धाम बनाएंगे।
शास्त्रोक्त विधि से भूमि का दिव्य शुद्धिकरण

आचार्य पंडित विजेंद्र शर्मा के निर्देशन में संपन्न हुए नींव पूजन में प्राचीन भारतीय वास्तु विज्ञान की झलक दिखाई दी। मंदिर की आधारशिला में केवल पत्थर नहीं, बल्कि भूमि की स्थिरता और सकारात्मकता के लिए चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा, सप्त मृतिका, पंच रत्न, कछुआ, मछली और गोमती चक्र जैसे मांगलिक द्रव्य अर्पित किए गए। संतों के मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच संपन्न हुई यह विधि इस बात का प्रमाण है कि यह धाम युगों-युगों तक समाज के लिए आध्यात्मिक शांति और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।
’10 रुपये प्रतिदिन’ के संकल्प से सिद्धि की ओर कदम
समाज के हर व्यक्ति को इस पुण्य कार्य से जोड़ने के लिए भामाशाह गोवर्धन आसनानी ने एक बहुत ही सरल और हृदयस्पर्शी सुझाव दिया। उन्होंने 51,000 रुपये का चेक समर्पित करते हुए आह्वान किया कि यदि प्रत्येक घर से प्रतिदिन मात्र 10 रुपये भगवान के चरणों में अर्पित किए जाएं, तो करोड़ों का यह लक्ष्य सहज ही प्राप्त हो जाएगा। बी.डी. टेकवानी के ओजस्वी संचालन में हुए इस उत्सव में गोविन्दराम आलवानी, प्रदीप कुमार मानकानी और बड़ी संख्या में गणमान्य जनों ने इस ‘समर्पण निधि’ अभियान में आहुति देने का संकल्प लिया। अंत में आरती और मीठे चावल के प्रसाद के साथ इस ऐतिहासिक दिन का समापन हुआ।



